अडानी गैस का बड़ा झटका: ₹119/SCM तक पहुंची गैस की कीमतें! मिडिल ईस्ट युद्ध ने बिगाड़ा बजट, जानें इंडस्ट्री पर असर।
अडानी टोटल गैस (ATGL) ने इंडस्ट्रियल गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण LNG सप्लाई चेन बाधित होने से कीमतें ₹119 प्रति SCM तक पहुंच गई हैं। जानिए इसका उद्योगों पर क्या असर होगा।
अडानी टोटल गैस का 'प्राइस शॉक': ₹40 से सीधे ₹119 पहुंची कीमत, उद्योगों के लिए बड़ी मुसीबत!
5 मार्च, 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की लपटों ने अब भारतीय उद्योगों के दरवाज़े पर दस्तक दे दी है। अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने इंडस्ट्रियल गैस की कीमतों में भारी वृद्धि का ऐलान किया है। कंपनी ने अपनी निर्धारित सीमा (Contracted Quantity) से अधिक गैस इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ाकर ₹119 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) कर दी हैं।
1. कीमतों में अचानक उछाल की वजह क्या है?
अडानी टोटल गैस, जो अडानी समूह और फ्रांस की 'टोटल एनर्जी' का संयुक्त उद्यम है, ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल का नतीजा है।
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सप्लाई चेन में रुकावट: ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली LNG सप्लाई लगभग ठप हो गई है।
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स्पॉट मार्केट में आग: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की 'स्पॉट' कीमतें $10 से बढ़कर $24-25/MMBtu तक पहुंच गई हैं, जिससे घरेलू कंपनियों के लिए गैस खरीदना महंगा हो गया है।
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अपस्ट्रीम कटौती: कंपनी को पीछे से मिलने वाली गैस की आपूर्ति में भारी कटौती (Curtailment) की गई है।
2. पहले क्या थी कीमत और अब क्या है?
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, इससे पहले जो अतिरिक्त गैस करीब ₹40 प्रति SCM पर मिल रही थी, उसकी कीमत अब ₹119 कर दी गई है। यानी करीब 3 गुना की सीधी बढ़ोतरी। यह नई दर उन ग्राहकों पर लागू होगी जो अपनी डेली कॉन्ट्रैक्ट क्वांटिटी (DCQ) से 40% से अधिक गैस का उपयोग करते हैं।
3. गुजरात गैस और अन्य कंपनियों का हाल
संकट केवल अडानी गैस तक सीमित नहीं है। भारत की सबसे बड़ी सिटी गैस कंपनी गुजरात गैस (Gujarat Gas) ने भी अपने इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) नोटिस जारी कर दिया है।
नोट: 'फोर्स मेज्योर' का अर्थ है कि कंपनी ऐसी परिस्थितियों के कारण गैस सप्लाई करने में असमर्थ है जो उसके नियंत्रण से बाहर हैं (जैसे कि युद्ध)।
[Image showing a comparison of industrial gas prices before and after the 2026 Middle East crisis]
4. भारतीय उद्योगों पर असर (Impact on India Inc.)
गैस की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर उन सेक्टरों पर पड़ेगा जो भारी मात्रा में ईंधन का उपयोग करते हैं:
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सिरेमिक और टाइल्स: मोरबी (गुजरात) जैसे सिरेमिक हब के लिए लागत में भारी इजाफा होगा।
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फर्टिलाइजर (उर्वरक): खेती के लिए जरूरी खाद महंगी हो सकती है, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।
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ग्लास और केमिकल: बिजली और गर्मी पैदा करने के लिए गैस का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों के मार्जिन में भारी गिरावट आ सकती है।
क्या यह संकट और गहराएगा?
अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा खिंचता है, तो गैस की कमी के कारण भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। अडानी टोटल गैस द्वारा कीमतों में की गई यह बढ़ोतरी केवल शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नज़रें सरकारी कंपनी GAIL और अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी पर हैं कि वे इस सप्लाई चेन को कैसे बहाल करते हैं।
आपकी क्या राय है? क्या सरकार को गैस की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए दखल देना चाहिए? कमेंट में अपनी बात कहें।





