दिल्ली vs हिमाचल पुलिस: AI समिट विरोध के बाद तड़के 5:30 बजे से आधी रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा!

जानें कैसे दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच छिड़ी 'कानूनी जंग'। AI समिट विरोध प्रदर्शन के बाद सुबह 5:30 बजे की दस्तक से लेकर आधी रात के गतिरोध तक की पूरी अनसुनी कहानी।

दिल्ली vs हिमाचल पुलिस: AI समिट विरोध के बाद तड़के 5:30 बजे से आधी रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा!
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नई दिल्ली | 26 फरवरी, 2026 राजधानी दिल्ली में आयोजित 'ग्लोबल AI समिट 2026' केवल तकनीक और इनोवेशन के लिए ही नहीं, बल्कि एक अभूतपूर्व पुलिसिया टकराव के लिए भी याद रखी जाएगी। पिछले 24 घंटों में दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच जो हुआ, उसने न केवल प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि संघीय ढांचे (Federal Structure) पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह कहानी शुरू होती है सुबह 5:30 बजे की एक दस्तक से और खत्म होती है आधी रात को एक हाई-प्रोफाइल स्टैंडऑफ के साथ। आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला।

तड़के 5:30 बजे: पहली दस्तक और गिरफ्तारी की कोशिश

कल सुबह जब दिल्ली सो रही थी, तब हिमाचल पुलिस की एक विशेष टीम ने दिल्ली के द्वारका इलाके में एक चर्चित एक्टिविस्ट के घर पर दस्तक दी। आरोप था कि इस एक्टिविस्ट ने AI समिट के दौरान हुए उन हिंसक विरोध प्रदर्शनों को उकसाया था, जिनके तार हिमाचल के कुछ संगठनों से जुड़े थे।

जैसे ही हिमाचल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेने की कोशिश की, दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन मौके पर पहुंच गई। दिल्ली पुलिस का तर्क था कि बाहरी राज्य की पुलिस बिना स्थानीय थाने को सूचना दिए और बिना 'ट्रांजिट रिमांड' के किसी को नहीं ले जा सकती।

दोपहर का गतिरोध: पुलिस स्टेशन बना अखाड़ा

दोपहर होते-होते मामला द्वारका के स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंच गया। एक तरफ हिमाचल पुलिस के आला अधिकारी वारंट दिखा रहे थे, तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की कानूनी टीम प्रक्रियाओं में खामियां निकाल रही थी। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब दोनों राज्यों के पुलिस कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

आधी रात का स्टैंडऑफ: कौन बड़ा?

शाम से आधी रात तक का समय सबसे नाटकीय रहा। हिमाचल पुलिस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उनके काम में बाधा डाल रही है और आरोपी को संरक्षण दे रही है। वहीं दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना था कि वे केवल सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 'गिरफ्तारी की गाइडलाइन्स' का पालन कर रहे हैं।

आधी रात के करीब, हिमाचल पुलिस की टीम को बिना आरोपी के ही वापस लौटना पड़ा, लेकिन यह विवाद अब कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है।

विरोध प्रदर्शन की जड़ में क्या है?

AI समिट के खिलाफ हो रहे इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह 'जॉब लॉस' (नौकरियों का जाना) और 'डेटा प्राइवेसी' है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एआई का अंधाधुंध उपयोग हिमाचल जैसे राज्यों के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को तबाह कर देगा। इन्ही प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली की सड़कों पर हिंसा हुई थी, जिसकी जांच अब दो राज्यों की पुलिस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है।

विशेषज्ञों की राय: क्या यह एक संवैधानिक संकट है?

कानूनी जानकारों का मानना है कि दो राज्यों की पुलिस के बीच इस तरह का 'लॉक्ड हॉर्न्स' (टकराव) होना बहुत दुर्लभ है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब राजनीतिक हित कानूनी प्रक्रियाओं पर हावी होने लगते हैं।