प्रहार (PRAHAAR): भारत की पहली एंटी-टेलर पॉलिसी लॉन्च, अब डिजिटल आतंकियों की खैर नहीं!
भारत सरकार ने देश की पहली व्यापक एंटी-टेलर पॉलिसी 'PRAHAAR' लॉन्च की है। जानिए कैसे यह नीति साइबर खतरों, ड्रोन हमलों और कट्टरपंथ पर लगाम लगाएगी।
भारत ने 23 फरवरी 2026 को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश की पहली आधिकारिक और व्यापक एंटी-टेलर पॉलिसी 'PRAHAAR' (प्रहार) जारी कर दी है। यह नीति न केवल सीमा पार से होने वाले पारंपरिक आतंकवाद, बल्कि आधुनिक युग के सबसे बड़े खतरे—साइबर हमलों और ड्रोन तकनीक के दुरुपयोग से निपटने के लिए तैयार की गई है।
'PRAHAAR' क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
'प्रहार' का अर्थ है वार करना। अब तक भारत के पास आतंकवाद से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के अपने-अपने प्रोटोकॉल थे, लेकिन एक एकीकृत 'नेशनल एंटी-टेलर डॉक्ट्रिन' की कमी थी।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह नीति किसी विशेष धर्म या संप्रदाय को निशाना नहीं बनाती, बल्कि आतंकवाद के 'इकोसिस्टम' को जड़ से खत्म करने का एक ब्लूप्रिंट है। यह जल, थल और नभ—तीनों मोर्चों पर भारत की सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देगी।
नीति के मुख्य आकर्षण: साइबर और डिजिटल खतरों पर लगाम
इस नई नीति में सबसे ज्यादा जोर साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism) पर दिया गया है। नीति के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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क्रिमिनल हैकर्स पर नकेल: गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि विदेशी शक्तियों द्वारा समर्थित हैकर्स भारत के पावर ग्रिड, रेलवे, बैंकिंग और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों (Critical Infrastructure) को निशाना बना रहे हैं। 'प्रहार' के तहत इन सेक्टरों की सुरक्षा के लिए एक विशेष 'साइबर कमांड' ढांचा तैयार किया गया है।
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डार्क वेब और क्रिप्टो पर नज़र: आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और क्रिप्टो वॉलेट्स की मॉनिटरिंग अब और सख्त होगी।
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ड्रोन और रोबोटिक्स का मुकाबला: पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमाओं पर ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक रोबोटिक्स का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
कट्टरपंथ और भर्ती के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस'
'प्रहार' नीति केवल हथियारों से लड़ने की बात नहीं करती, बल्कि यह ऑनलाइन कट्टरपंथ (Digital Radicalisation) को रोकने पर भी केंद्रित है:
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सोशल मीडिया निगरानी: युवाओं को गुमराह करने वाले भड़काऊ कंटेंट और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले अकाउंट्स पर त्वरित कार्रवाई होगी।
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डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम: जो युवा कट्टरपंथ की राह पर भटक गए हैं, उनके लिए सरकार ग्रेडिड पुलिस रिस्पांस और काउंसलिंग प्रोग्राम चलाएगी।
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सामुदायिक नेतृत्व: इस नीति में धर्मगुरुओं और एनजीओ (NGOs) को भी शामिल किया गया है ताकि समाज में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।
कानूनी प्रक्रिया में बदलाव
अक्सर देखा जाता है कि आतंकी मामलों में जांच और कानूनी कार्यवाही में देरी होती है। 'प्रहार' के तहत अब:
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FIR दर्ज होने से लेकर अदालती कार्यवाही तक, हर स्तर पर कानूनी विशेषज्ञों (Legal Experts) की सलाह ली जाएगी ताकि केस कमजोर न पड़े।
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NIA और राज्य पुलिस के बीच खुफिया जानकारी (Intelligence) साझा करने के लिए एक 'सेंट्रल प्लेटफॉर्म' को अनिवार्य बनाया गया है।





