सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा हमला, गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन को बताया 'विनाशकारी'
"असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन को बताया 'विनाशकारी'। जानिए किन गंभीर आरोपों के बाद असम की राजनीति में मचा बवाल?"
गुवाहाटी: असम की राजनीति में बयानों का पारा एक बार फिर चरम पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं—गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन—पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें राज्य के इतिहास का "सबसे विनाशकारी राजनेता" करार दिया है। सीएम के इस बयान ने असम के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
'विनाशकारी' क्यों कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन दोनों नेताओं पर आरोप लगाया है कि वे न केवल राज्य के विकास में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि अपनी राजनीति को चमकाने के लिए सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
सीएम ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन जैसे नेताओं को नहीं देखा, जो कथित तौर पर अपने निजी हितों के लिए राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाने में संकोच नहीं करते।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
गौरव गोगोई पर हमला बोलते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने पुराने मामलों को फिर से हवा दी है। उन्होंने उन तस्वीरों और दावों का जिक्र किया, जिनमें कांग्रेस नेता के पाकिस्तान उच्चायोग जाने की चर्चा थी। मुख्यमंत्री ने इसे बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा:
"एक सांसद का पाकिस्तान के प्रति झुकाव और वहां के उच्चायुक्त के साथ मुलाकात करना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। यह असम की जनता के लिए गर्व की बात नहीं है, बल्कि एक गंभीर चिंता का विषय है।"
रकीबुल हुसैन पर निशाना
रकीबुल हुसैन को लेकर मुख्यमंत्री का रुख और भी आक्रामक रहा। उन्होंने उन पर सांप्रदायिक राजनीति करने और वोट बैंक की खातिर राज्य की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को प्रभावित करने वाले तत्वों का समर्थन करने का आरोप लगाया। सीएम का आरोप है कि ये नेता असम को उन पुरानी समस्याओं में धकेलना चाहते हैं, जिनसे राज्य बड़ी मुश्किल से बाहर निकला है।
विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हिमंत बिस्वा सरमा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ध्यान भटकाने की राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार, जब भी मुख्यमंत्री को राज्य की जनता के सवालों का सामना करना पड़ता है, वे ऐसे ही व्यक्तिगत हमलों का सहारा लेते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हिमंत बिस्वा सरमा का यह कड़ा रुख आगामी चुनावों के लिए एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। वे गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन को 'नकारात्मक' या 'विनाशकारी' के रूप में पेश कर जनता के बीच एक राष्ट्रवाद का नैरेटिव सेट करना चाहते हैं।
असम की राजनीति में सीएम सरमा बनाम कांग्रेस का यह संघर्ष अब व्यक्तिगत स्तर तक पहुँच चुका है। जहाँ एक तरफ सरकार इसे 'राज्य की सुरक्षा और अस्मिता' की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'तानाशाही' और 'बदले की राजनीति' करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और भी तीखा होने के आसार हैं।





