पीएम मोदी का ममता सरकार पर बड़ा हमला: 'TMC ने पार की सारी सीमाएं, राष्ट्रपति मुर्मू और आदिवासियों का किया अपमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान को लेकर पश्चिम बंगाल की TMC सरकार को आड़े हाथों लिया है। जानें क्या है पूरा विवाद और पीएम ने क्यों कहा कि 'TMC ने मर्यादा खो दी है'।
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राज्य की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन (International Santal Conference) के आयोजन में भारी अव्यवस्था देखने को मिली।
-
वेन्यू में अचानक बदलाव: अंतिम समय में प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से हटाकर एक छोटे और दुर्गम इलाके गोसाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।
-
राष्ट्रपति की नाराजगी: खुद राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम के दौरान अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि स्थान छोटा होने के कारण हजारों संताल भाई-बहन इस गौरवशाली कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए।
-
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: राष्ट्रपति के बंगाल आगमन पर न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही उनका कोई वरिष्ठ मंत्री अगवानी के लिए मौजूद था।
पीएम मोदी का करारा हमला: 'शर्मनाक और अभूतपूर्व'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक कड़े संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया।
"पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने वास्तव में सारी सीमाएं पार कर दी हैं। प्रशासन का यह व्यवहार राष्ट्रपति जी के प्रति घोर अपमान है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि संताल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से देख रही है।"
पीएम ने आगे कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है, लेकिन टीएमसी ने राजनीतिक विद्वेष के कारण इसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई है।
ममता बनर्जी का पलटवार
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव (Bengal Assembly Elections 2026) को देखते हुए राष्ट्रपति के पद का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रही है। उन्होंने राष्ट्रपति को सलाह दी कि वे भाजपा के इशारे पर राजनीति में न पड़ें।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बंगाल के आदिवासी बहुल इलाकों (जंगलमहल और उत्तर बंगाल) में बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। भाजपा इसे 'आदिवासी अस्मिता' से जोड़कर देख रही है, वहीं टीएमसी इसे राज्य के काम में केंद्र का हस्तक्षेप बता रही है।
राष्ट्रपति पद की गरिमा और जनजातीय समाज के सम्मान का यह मुद्दा अब दिल्ली से लेकर कोलकाता तक गूंज रहा है। प्रधानमंत्री के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीतिक लड़ाई और भी आक्रामक होने वाली है।





